सोमवार, जुलाई 19, 2010

विनय शर्मा @ आत्म विश्लेषण


लेखकीय-- गाजियाबाद के ब्लागर श्री विनय शर्मा के ब्लाग पर कई बार गया । पर किसी तकनीकीकारणवश " मेरे बलोग " नामक वह ब्लाग मेरे सिस्टम पर नहीं खुलता था । आखिर कई बार के प्रयास
के बाद मैंने श्री शर्मा जी को email किया । और अगली बार जब ब्लाग पर गया तो ब्लाग खुल गया । sunday का दिन था । विनय जी के लेखों को पडना शूरू किया तो पडता ही चला गया । उनकी कई
शहरों की जीवनी से लेकर । उनकी पत्नी की नस खिंच जाना । उनकी इंगलेंड की प्रथम हवाई यात्रा । उनकी भक्ति के अनुभव । सामाजिक जीवन के अनुभव । पिता जी से उनके भावनात्मक सम्बन्धों पर उनका दृष्टिकोण आदि लगभग सभी लेखों को एक ही बार में पड डाला । विनय जी स्वयं जिस प्रकार के सीधे सरल इंसान हैं । उसी सरल अंदाज में अपनी बात कहतें हैं । किसी मासूम बच्चे सी उनकी सरलता दिल को छू जाती है । इसका अंदाज आप इसी बात से लगा सकते हैं । कि 56 साल के हो चुके विनय जी को आज भी कहीं ये कसक है कि उनके पिता ने उनके बालमन को समझने में भूल की । क्या ये साबित नहीं करता कि वही मासूम बच्चा आज भी उनके मन में छुपा बैठा है । खैर उनका ये " आत्म विश्लेषण " वाला लेख मुझे काफ़ी अच्छा लगा । जिसे में विनय जी की ना जानकारी में उपयोगी समझते हुये अपने पाठकों के लिये प्रकाशित कर रहा हूं । मुझे यह आशा है कि विनय जी मेरी इस धृष्टता को अन्यथा नहीं लेंगे । तो पडें ये लेख । आत्म विश्लेषण । साभार । श्री विनय शर्मा । मेरे बलोग ।

आत्म विश्लेषण स्वयं को स्वयं से अलग करके ईमानदारी के साथ अपना विश्लेषण करना है ।मनुष्य के भीतर अनेको भाव समाहित होते है कहते हैं परिवर्तन ही विश्व का नियम है, इसी प्रकार से मनुष्य के मस्तिष्क मे तो क्षण प्रतिक्षण तो विचारो का उद्देलन होता रहता है, और भाव भी करवट लेते रहते हैं, कभी किसी भाव की अधिकता, किसी की न्यूनता, भावो की बदलती परिस्थितिया तो आत्म विश्लेषण कैसे हो ?सम्भवतय शांत मन से अपना विश्लेषण करे ज्योतिषाचार्यो के हिसाब से जब मनुष्य जन्म लेता है, तो ग्रहो की स्थितिया उसके आने वाले जीवन को प्रभावित करती हैं, अब प्रश्न उठता हैं, कौन से ज्योतिष शास्त्र से दूरगामी जीवन अधिक प्रभावित होता है, हिन्दी ज्योतिष जो कि चंद्रमा पर आधारित है, या अंग्रेजी ज्योतिष जो सूर्य पर आधारित है, इन दोनों पद्धतियों मैं सामन्जस्य कैसे करे,और भी भविष्यवाणी की पद्धतिया प्रचलित हैं, जैसे टैरो कार्ड इत्यादि पर इन सबका केन्द्र बिन्दु एक कैसे हो ?यह भी कहा जाता है, कि प्राणियों पर पूर्बजन्म का प्रभाव होता है, परन्तु विरले ही ऐसे हैं जिनको अपना पूर्ब जन्म ज्ञात हैं उस पर भी मालूम नहीं कि उनके व्यक्तित्व पर पूर्वजन्म का प्रभाव है कि नहीं, स्वामी योगानंद परमहंस ने कहीं लिखा था कि उनकी छुरी,कांटे से खाने की आदत थी, उन्होने तो विश्वास से लिखा था, परन्तु एक साधारण मनुष्य मैं ऐसी क्षमता कहाँ ।बदलता सामाजिक परिवेश भी तो इन्सान के व्यक्तिव पर प्रभाव डालता है, जैसे कि गौतम बुद्ध,तुलसी दास इत्यादि। महात्मा गौतम बुद्ध ने रोगी,वृद्ध मनुष्य और मृत्यु को देखा तो वो मनन करते रहे, और बौद्ध धर्मं के संस्थापक हुए, उनका व्यक्तित्व ही बदल गया, कभी कभी मन पर आघात होने पर व्यक्तित्व बदल जाता है, जैसे तुलसीदास अपनी पत्नी के प्रेम मैं अत्यधिक पड़े थे, उनकी पत्नी ने कहा हाड़,चरम से इतना प्यार है,अगर भगवान से इतना प्यार होता तो भगवान मिल जाते, तुलसीदास रसिक व्यक्तित्व को छोड़ के भक्ति मे लग गए, और एक पूर्ब रसिक,प्रेमी ने हिंदू धर्म के धार्मिक काव्यग्रंथ की रचना कर डाली, उसी मे एक पंक्ति है, " पर उपदेश कुशल बहुतेरे " कितने लोग अपना आत्मविश्लेषण कर पाते हैं, दूसरो को उपदेश देते हैं, कबीर ने तो यहाँ तक कहा है, " निंदक नियरे रखिये आँगन कुटी बनाये बिनु पानी बिन साबुन निर्मल करत सुभाय " परन्तु किस मैं इतनी सामर्थ्य है कि अपनी निंदा सुने और उस पर आधारित अपना विश्लेषण करे। जीवन अपने मैं व्यस्तमौत से वो पस्त आँचल मैं चिराग जलायेचलता जा रहा हैजलता जा रहा हैकोई दीपशिखा की तरहकोई शमा की तरहअनजाने कितने वादेअनजानी कितनी यादेजीवन अपने मैं व्यस्तमौत से वो परस्त
" जाकी रही भावना जैसी । हरि मूरत देखी तिन तैसी । " " सुखी मीन जहाँ नीर अगाधा । जिम हरि शरण न एक हू बाधा । " विशेष--अगर आप किसी प्रकार की साधना कर रहे हैं । और साधना मार्ग में कोई परेशानी आ रही है । या फ़िर आपके सामने कोई ऐसा प्रश्न है । जिसका उत्तर आपको न मिला हो । या आप किसी विशेष उद्देश्य हेतु
कोई साधना करना चाहते हैं । और आपको ऐसा लगता है कि यहाँ आपके प्रश्नों का उत्तर मिल सकता है । तो आप निसंकोच सम्पर्क कर सकते हैं ।

2 टिप्‍पणियां:

Rajeev ने कहा…

राजीव जी आपने कोई धृष्टता नहीं की,जो आपने लिखा है,उसमें मुझे कोई
धृष्टता नजर नहीं आती ।

shama ने कहा…

Vinay ji waqayi aisehee hain...unka lekhan isiliye itna paardarshi hota hai.

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