मंगलवार, अप्रैल 27, 2010

पिये बगैर पेप्सी नाय मोय चैन परेगो

रोटी मजा न देगी कदुआ मजा न देगो
खाये बगैर वर्फ़ी जीवन मजा न देगो
समझाय रही हूँ तुझको कार लाय दे मुझको
कार में न जाऊंगी तो जायबो मजा न देगो
लस्सी मजा न देगी शरवत मजा न देगो
पिये बगैर पेप्सी नाय मोय चैन परेगो
बतलाय रही हूँ तुझको घुमाय आगरा मुझको
ताजमैल नाय देखूंगी तो कैसे चैन परेगो

1 टिप्पणी:

राकेश कौशिक ने कहा…

ताजमैल नाय देखूंगी तो कैसे चैन परेगो - वाह

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